भालूओं के दर्द तो समझो यार!

0
57

माँ बचपन से कहती आ रही है मुझसे कि भालूओं को शहद बहुत पसंद है। पेड़ की टहनियों से आलिंगनबद्ध शहद को बेतहाशा यूं ही नोंच डालने में भालू माहिर होते है। अगर पांडा को छोड़ दें तो बाकि सारे भालू माँसाहारी होते है और जानवर तो जानवर वो इंसान तक को भी नोंच डालते है। भालू की कुछ ऐसी विपरीत छवि मेरे मन-मस्तिष्क में मुझे जानने वालों ने बचपन से बैठाने की कोशिश की और कुछ हद तक वो सफल भी हो गए थे। किंतु मेरा भ्रम चौथी कक्षा में तब टूटा, जब एक प्यारे से काले भालू को मदारी के डमरू की ‘डमडम’ की आवाज पर ताल से ताल मिलाकर थिरकते देखा। थिरकना शब्द मेरी दृष्टि में उस भालू के लिए भले ही उचित न हो किंतु आम जनमानस की समझ और भाषिक ज्ञान ने आखिरकार मुझसे भी भालू के उस रूंधे गले की मौन नाच को थिरकना कहवा ही लिया। उस भालू के नाच में मुझे न जाने क्यों दशहरे के मूर्ति विसर्जन के दिन मूर्ति के पीछे चलते ट्रैक्टर या ट्राली पर संघर्ष के चरमोत्कर्ष से अपने तथा अपने नाजायज बच्चे के अस्तित्व की लड़ाई लड़ती नर्तकी याद आ जाती है क्योंकि उसका भी मजबूर होकर किया गया नृत्य लोगों को थिरकना ही तो लगता है। भालू हो या बंदर या फिर नर्तकी$,सबको अपने इशारों पर नचाकर मनुष्य कितना शेखी बघारता है न?

जरूर पढ़ें:  विश्व का आठवां महादेश: जीलैंडिया (Zealandia)

भालूओं की चंचलता,उनकी उनमुक्तता एवं उनका निर्विकार होकर देशाटन करना मुझे शुरू से भाता रहा है। किंतु अब अचानक ही उनके व्यवहार में परिवर्तन ने मुझे बैचेन कर दिया है। अब सारे भालू एकदम शांत है, एकदम स्थिर।सुख-दुख में अनकी अब कोई भी सहभागिता नही होती। शहद अगर कही दिख भी जाए तो उसे छूते तक नहीं। क्या कभी मंथन किया है आपने कि उनके व्यवहार में सहसा ही ऐसे परिवर्तन का क्या कारण होगा? गाँवों में बहुत सारी मान्यताएं हैं और उनमें से एक यह भी है कि भालूओं से नितंब पर फूंकवाने से आदमी मोटा होता है। मेरे दोस्त बड़े-बाबू ने ऐसा किया भी किंतु उस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और वह पहले से भी ज्यादा दुबला हो गया।ऐसी धारणाओं की आड़ में भालूओं की जान दाँँव पर लगाकर अच्छे-खासे पैसों का गोरखधंधा चलता है,जिसमें वन-विभाग के अनेक अधिकारी भी शामिल होते हैं। क्या भालूओं की कुछ इच्छाएं, आकांक्षाएं एवं अभिलाषाएं नही होती? क्या उनकी तंत्रिका-तंत्र हम मानवों के तंत्रिका-तंत्र की भाँति Synapse से एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन को संदेश नही देती होंगी?क्या भालूओं की तंत्रिकाएं Stimuli को पढ़ नही पातीं? भालूओं के यदि हम मानसिक विकास को छोड़ दें तो बाकि सारी क्रियाओं में वो मानव से कोई कम नहीं है। फिर भालूओं से इतनी ज्यादती क्यों? भालूओं के पित्त (Pancreatic Juice) से कैंसर एवं गठिया जैसी कितनी ही असाध्य बीमारियों को ठीक किया जाता है। Food-Chain एवं Trophic Level में भालूओं की अपनी महती भूमिका है। यदि भालू न हों तो भोजन-श्रृंखला का बना बनाया स्वरूप बिगड़ जाएगा। भालू के इतने गुणों को जानने के बाद भी हम उनकी हत्या करके उनके चमड़ो को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचकर करोड़ों कमा रहे है।क्या धनलोलुपता एवं मानव का भौतिक जीवन इन जीवों से,इस प्रकृति से बढ़कर है?

जरूर पढ़ें:  मनुष्य की उम्र इतनी लंबी क्यों है? - श्री शिव महापुराण कथा

भालू Mammalia वर्ग का एक जीव है,जिसका वैज्ञानिक नाम ‘Ursidae’ है। Giant Panda से लेकर Brown Bear, Polar Bear, Sun Bear, Spectacled Bear एवं Black Bear इत्यादि कुल आठ भालूओं की प्रजाति पायी जाती है। Polar Bear जैसे भालू तो अपने जीवन का आधा हिस्सा Hibernation (शीतनिष्क्रियता) में बीता देते हैं। इतिहास उठाकर देख लीजिए आप, भालूओं की इन आठ प्रजातियों में से कभी भी किसी भालू ने इंसानों की दिनचर्या में हस्तक्षेप नही किया है किंतु मानव तो Ex-Situ संरक्षण की आड़ में भालू जैसे कितने ही जीवों को पिंजड़ों में बंद करके काली कमाई करता है। यदि हम शिकारियों को सख्ती से दंडित करे, जंगलों के अतिक्रमण पर समुचित कदम उठाये तो फिर Ex-Situ संरक्षण की जरूरत ही नही पड़ेगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आज बस 6000-8000 तक ही भालू बचे हुए है। दूरदर्शी पर्यावरणविद् एवं भारत सरकार के कुशल नेतृत्व में भालूओं को उनके ही प्राकृतिक आवास में बचाने की यानि In-Situ संरक्षण की पहली कोशिश 1978 में गुजरात के बनासकाँठा में हुई थी, जहाँ देश के पहले भालू अभ्यारण्य ‘Jessore Sloth Bear Sanctuary’ की स्थापना की गई थी।यहां भालू आपको अपने ही मिजाज में, खुद में मस्त पेड़ों से लटकते दिखेगें। इसके बाद 1994 में कर्नाटक के बल्लारी जिले में Daroji Sloth Bear Sanctuary की स्थापना की गई थी। भालूओं के प्राकृतिक संरक्षण में वर्ष 1999 मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि इसी वर्ष उत्तरप्रदेश के आगरा में विश्व के सबसे बड़े ‘Agra Bear Rescue Facility’ की स्थापना की गई थी,जहाँ आज भी दो सौ से ज्यादा भालू आपको मिल जायेंगे। भालूओं के संरक्षण में भारत एवं राज्य सरकार के ये बहुत ही महत्वपूर्ण कदम रहे हैं। एक मानव होते के नाते आइए हम,आप और हम सभी प्यार के भूखे इन भालूओं को प्यार दें,अच्छा लगेगा,इन्हें भी और हमें भी।।

जरूर पढ़ें:  10 लड़ाकू विमान राफेल के दिमाग चकरा देने वाला महत्वपूर्ण खुबिया

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here