कलम (Pen) के बारे में जानकारी

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कलम हमारी सबसे उपयोगी और सहायक चीजो मे से है। यह लिखने वालो की सबसे जरूरतमंद चीज है।ऐसा कहा जाता है कि हर तरह के लेखो का आधार कागज है परंतु अगर कलम न होती तो कागज पर लेखनी कैसे लिखी जाती? कलम का एक अलग ही महत्व है। बङे – बङे अफसरो की लिखी हुई बाते टाली नही जा सकती है। अगर स्याही न होती, तो ग्रंथों का ज्ञान प्राप्त न होता।

कलम का एक बहुत बड़ा दरकार स्कूल तथा कॉलेज मे भी है विद्यार्थी बिना कलम के पढ़ाए गए पाठ को अपनी पुस्तक मे नही लिख पाएंगे और गई कागजात बिना हस्ताक्षर के रूकी रहेंगी।

कलम का आविष्कार किसने और कब किया

जैसा कि हम सब जानते है पुराने युग मे ऋषि, मुनी स्याही तथा पंखो से लिखा करते थे पंख को स्याही मे डुबोकर उससे लिखते थे।वर्तमान मे पंख की जगह कलम ने ले ली और स्याही उसके अंदर जा बसी। कलम के आ जाने से समय की बहुत बचत हुई। इसके आविष्कारक लेविस इ वाटरमैन थे। इन्होने 953 को इसे बनाया था। धीरे-धीरे कलम कइ तरह की हो गई।

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जैसे- बाॅल पेन, झालर पेन (Fountain pen), जेल पेन इत्यादि।

बाॅल पेन

बाॅल पेन के आविष्कारक थे जोस बीरो और उनके भाई जोर्जी बीरो। इन दोनो ने इसे 15 जुलाई 1938 को “बीरो” पेन के नाम से पेटेंट कराया था। अभी भी बहुत सारी जगह जैसे – इटली,ब्रिटेन आस्ट्रेलिया आदि मे अभी भी इसे बीरो पेन ही कहते है। अमेरिका में इसे बॉल पॉइंट पेन के नाम से पुकारते हैं। बॉल पेन के आने से काम और भी जल्दी होने लगे हैं इसमें स्याही बदलने की जरूरत नहीं पड़ती तथा यह बहुत टिकाऊ होती है।इसकी खरीदारी भी बहुत है और आज इसका उपयोग चरम सीमा पर है।

झालर पेन (Fountain Pen)

यह कलम प्रयोग मे कम आती है परन्तु लिखने वाले इसका खूब शौक रखते है। इसकी खोज लुईस इ वाटरमैन ने 1884 मैं की थी। इसे पुराने युग में बहुत प्रयोग किया जाता था परंतु बार-बार स्याही बदलनी पड़ती थी। बॉल पेन के आने के बाद इसका प्रयोग कम हो गया। परंतु आज भी यह उतनी ही प्रसिद्ध है जितनी कि तब थी।

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पहले सिर्फ काली स्याही का प्रयोग होता था परन्तु अब तो कई सारी स्याही जैसे- हरा, नीला, कत्थई, नारंगी भिन्न-भिन्न तरह के रंग मौजूद है। रंगों के साथ-साथ अब चमकदार स्याही का भी प्रयोग खूब किया जाता है। तरह-तरह के चमकीले स्याही से लिखने में तथा सजाने के लिए खूब प्रयोग किया जाता है। बच्चे इसे अपने स्कूल की गतिविधियों के लिए खूब प्रयोग करते हैं।

परंतु जब से मोबाइल, कैलकुलेटर, लैपटॉप इत्यादि आई है। तब से कलम का उपयोग कम हो गया है। जैसे-जैसे तकनीकी मैं बढ़ोतरी हो रही है वैसे वैसे कलम का प्रयोग कम होता जा रहा है। भविष्य में ऐसा भी हो सकता है कि कलम का कोई और रूप अा जाए जैसे कि पंख की जगह कलम ने ले ली उसी तरह हो सकता है कलम की जगह कोई और तकनीक आ जाए।

आज भी न्यायालयों में भिन्न-भिन्न रंगों की कलम का इस्तेमाल किया जाता है।

वह कहावत है ना

“कलम तलवार से भी ज्यादा ताकतवर होती है।”

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यानी कि जहां धार वाले तलवार काम नहीं आते वहां एक छोटी सी कलम काम आ जाती है। एक कलम से की गई हस्ताक्षर मुजरिम की मृत्यु घोषित कर सकती हैं। कलम सा शक्तिशाली कोई यंत्र नहीं है। जितनी सक्षम कलम को हासिल है उतनी तलवार को भी नहीं है।

कलम की मदद से यह दुनिया बदल सकती हैं और बदली भी है। कलम हमारा हथियार है इससे हम दुनिया को मात दे सकते हैं। परंतु आज के समय में बैंक, दफ्तर शिक्षण संस्थाओं में जितना कि कंप्यूटर का महत्व मिलता है कलम उससे कुछ निम्न धापे पर पहुंच चुका है पहले के जमाने में कलम का महत्व ही कुछ और था अभी भी है परंतु वर्तमान में रहेगी यह कहा नहीं जा सकता।

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