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एक साधारण सी हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ने वाली लड़की ने IAS का सपना कैसे पूरा किया, जानिए कैसा रहा होगा सुरभि गौतम का सफर

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मध्य प्रदेश: कहते हैं सपने को हासिल हर कोई नहीं कर पाता लेकिन जिसने लक्ष्य को ही जीवन मान लिया हो उसे वक़्त और हालात भी नहीं हरा पता है। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में सुरभि ने अपना बचपन बिताया। वो भी गांव और परिवार के अन्य बच्चों के तरह हिंदी मीडियम स्कूल जाया करती थी।उसपे कोई खास ध्यान भी नहीं दिया जाता था। एक साधारण गांव में साधारण जीवन उसने व्यतीत किया।

सुरभि के लक्ष्य की पहले सीढ़ी 

जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए भीड़ से अलग पहचान बनानी ही पड़ती है। कुछ ऐसा ही सुरभि ने किया और अपने मुकाम को हासिल किया। जब सुरभि ५वी कक्षा में थी तो उसने गणित में १०० में १०० अंक प्राप्त किए। उनके परिणाम से उनके घर वाले को कोई खास मतलब नहीं थी क्युकी किसी के पास वक्त नहीं था बच्चों पे भी ध्यान देने का। रिजल्ट के बाद सुरभि की कॉपी देख कर उनके टीचर ने काफी तारीफ की और उसे आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया। उन्होंने सुरभि को यह भी समझाया की आप बहुत आगे तक जा सकती हो बस अपनी टैलेंट को निखारने की आवश्यकता है। बस वही से सुरभि ने अपने लक्ष्य की पहली सीढ़ी पे कदम रखी और उसी वक़्त उसने ये सोचा कि यदि कुछ हासिल करनी है तो बस पढ़ाई से ही कर सकते। 

वीडियो को देखने के लिए यहां क्लिक करें https://youtu.be/sKvMxZ284AA

दसवीं में यूं ही कलेक्टर बनने का सपना

दसवीं के परिणाम आते ही सुरभि ने इस बार केवल गणित ही नहीं बल्कि विज्ञान में भी १०० में १०० अंक प्राप्त किए और बहुत अच्छे रैंक भी हासिल किया। ये सुनते ही पत्रकार ने उनके घर पे दस्तक दिया और उनके सपनों और उनके लक्ष्य का जिक्र किया। लेकिन उस वक़्त तक सुरभि ने कुछ नहीं सोचा था और उसने जवाब में भी बोली अभी नहीं पता। फिर पत्रकार ने बोला कुछ भी बोल दीजिए तो उसने कलेक्टर बोल दिया। बस अगले दिन तो सुरभि अखबार में यूं छा गई और शायद उसी दिन यह बात उसके दिमाग में भी छप गई थी।

हिंदी मीडियम से अंग्रेजी मीडियम का सफर

जिस तरह समुद्र की लहरे लहराने से बाज़ नहीं आती कुछ उसी तरह सुरभि भी लगातार कमाल करने से बाज नहीं आ रही थी। पीसीएम में अच्छे अंक प्राप्त होने के बाद सुरभि को एपीजे अब्दुल कलाम स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई। गांव से बाहर जाने वाली पहली लड़की सुरभि थी जिसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बाहर जा के की। मुश्किल तो बहुत था एक गांव की साधारण लड़की को अंग्रजी मीडियम में ढलना। उस लैब एक्सपेरिमेंट में भी काफी कठिनाइयां हुई। जहा लोग बेहिचक अंग्रेजी बोले जा रहे थे वहीं बेचारी सुरभि सबसे छिप छिपाते चलती थी। सुरभि ने अपनी मां की बातों को याद करते हुए यह निश्चित कर लिया कि अब अंग्रेज़ी पर वो काबू पा कर ही रहेगी।

कड़े प्रयास से सफलता जरूर कदम स्पर्श करती है

बस सुरभि ने कभी हार नहीं मानी और खुदा भी उसकी प्रयास को व्यर्थ जाने नहीं दिया। इंजीनियरिंग के ठीक बाद उसने बहुत से एग्जाम दिए और उसने एक बार में ही सारे एग्जाम निकाल लिए। उसने यूपीएससी की भी परीक्षा दी और आईएएस में (AIR 1st ) हासिल किया। कुछ इस प्रकार उसने अपनी लक्ष्य को अपने कदम स्पर्श कराया। 

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