मुख्य पृष्ठ निबंध ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण)

ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण)

0
12

ग्लोबलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विश्व स्तर पर कई देश मिलकर स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं या घटनाओं का रूपांतरण करना होता है। इसकी मदद से कई देश प्रगति की नए आयाम पर अपना राह बनाया है। ग्लोबलाइजेशन की मदद से हम अपने दैनिक जीवन में प्रयोग लाने वाले वस्तुएं जैसे में भोजन, कपड़े, फर्नीचर, बिजली का सामान या दवाइया अथवा आराम और मनोरंजन की चीजें आदि।

अगर हम इसका विस्तार रूप से वर्णन करें तो यह कहा जा सकता है कि पूरे विश्व के लोग मिलकर एक समाज बनाते हैं जिसके अंतर्गत हम आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और राजनीतिक ताकतों का विस्तार करते हैं। वैश्वीकरण को अक्सर हम देश के आर्थिक रूप से हो रहे विकास को देखते हैं। ग्लोबलाइजेशन का अर्थ है आवर्थिक प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय सीमाओं लेन देन से व्यापार के जरिए लाभ उठाना और एक दूसरे की मदद करना होता है।

ग्लोबलाइजेशन के अंतर्गत कच्चे माल को किसी दूसरे देश से लिया गया हो उस पर संशोधन का ज्ञान किसी दूसरे देश के पास हो सकता है उस कच्चे माल पर किसी दूसरे देश में संशोधन प्रक्रिया किया जा सकता है और अंततः उस पर किसी दूसरे देश से उत्पादन के लिए आर्थिक मदद लिया गया हो सकता है। इस सारी प्रक्रिया में हम यह देख रहे हैं कि विश्व के किसी भी देश से वस्तुएं ली जा रही है और किसी भी देश में वस्तुओं पर किया जा रहा है और किसी दूसरे देश से इसके उत्पादन के लिए पैसे आ रहे हैं। और इस तरह के वैश्वीकरण मैं जुड़े हुए सभी देशों का अपना लाभ और विकास जुड़ा हुआ है।

जरूर पढ़ें:  क्रिकेट पर शुद्ध हिंदी में निबंध | Cricket Par Hindi Mein Essay

वैश्वीकरण की प्रक्रिया में कई देश एक दूसरे पर परस्पर निर्भर हो जाते हैं। इसमें जुड़े हुए देश अपने साथ साथ दूसरे देश को भी मदद करता है तथा उससे अपने विकास के लिए मदद लेता है। उदाहरण के लिए पेट्रोल और डीजल के लिए लगभग सारे विश्व में प्रमुख सऊदी अरब जैसे देश के ऊपर निर्भर रहता है। कपास से बनने वाले सूती कपड़े के लिए अधिकतर देश भारत और जापान जैसे देशों पर आश्रित रहता है।

इसी तरह विश्व के सारे देश एक दूसरे से वैश्वीकरण प्रक्रिया में जुड़े हुए हैं। वैश्वीकरण का सबसे बेहतर उदाहरण कपड़ों के ब्रांड और मैक डॉनल्स जैसी कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार। वैश्वीकरण को कई महीनों में अंतर्राष्ट्रीयकरण भी कहा जा सकता है चौकी किसी भी वस्तु का आयात या निर्यात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही होता है।

कुछ प्रसिद्ध समाजशास्त्री के वैश्वीकरण पर कथन:

• टॉम.जी.पाल्मर: “सीमाओं के पार विनिमय पर राज्य प्रतिबंधों का ह्रास या विलोपन और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न हुआ उत्पादन और विनिमय का तीव्र एकीकृत और जटिल विश्व स्तरीय तंत्र।”

• थामस एल फ्राइडमैन: “वैश्वीकृतव्यापार, आउटसोर्सिंग, आपूर्ति के श्रृंखलन और राजनीतिक बलों ने दुनिया को, बेहतर और बदतर, दोनों रूपों में स्थायी रूप से बदल दिया है।”

• नोअम चोमस्की: “सैद्वांतिक रूप में वैश्वीकरण शब्द का उपयोग, आर्थिक वैश्वीकरण के नव उदार रूप का वर्णन करने में किया जाता है।”

• हर्मन ई. डेली: “कुछ मामलों में अंतर्राष्ट्रीयकरण और वैश्वीकरण शब्दों का उपयोग एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है लेकिन औपचारिक रूप से इनमें मामूली अंतर है।”

जरूर पढ़ें:  विद्यार्थियों पर दूरदर्शन का प्रभाव

वैश्वीकरण दो क्षेत्रों पर निर्भर करता है – उदारीकरण और निजीकरण।

उदारीकरण

उदारीकरण का मतलब है औद्योगिक क्षेत्रों के नियमों में ढील दिया जाता है, ताकि विदेशी कंपनियां घरेलू व्यापारीक क्षेत्र में इकाइया लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

निजीकरण

और निजीकरण का अर्थ होता है कि निजी व्यापारिक क्षेत्र की कंपनियों को अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए उत्पादन की अनुमति और प्रोत्साहित किया जाता है। पिछले दो दशकों से वैश्वीकरण के आधुनिक रूप पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। वैश्वीकरण के जरिए कई देशों में सरकार के स्थान पर बहुराष्टरीय कंपनियों मुख्य भूमिका निभाने की अनुमति प्रदान करता है।

वैश्वीकरण का प्रभाव विकसित देशों की तुलना में विकासशील देश से अलग होता है। वैश्वीकरण शब्द का उपयोग अर्थशास्त्रियों के द्वारा 1980 में किया जा रहा है। 19वीं सदी को वैश्वीकरण का प्रथम युग कहा जाता है। हालांकि कुछ लेखकों का यह मानना है कि वैश्वीकरण का 16वीं सदी वास्तविक शुरुआत हुआ था। बीसवीं सदी से इसका विस्तार शुरू होने लगा।

वैश्वीकरण के अलग क्षेत्र के अलग प्रभाव:-

आर्थिक प्रभाव:-

वैश्वीकरण के वजह से देश में अन्य देशों से नवीनतम प्रौद्योगिकी , नवीनतम मशीन और पुंजी का भी आगमन होता है। ये संसाधनों का निजीकरण में बहुत कारगर होता है हालांकि लाभ कमाने की दृष्टि से संसाधनों का शोषण होता भी है। परंतु निजीकरण उन लोगों को संसाधनों का उपभोग से वंचित कर देता है जो आर्थिक रूप से कम क्षमता रखते हैं।

सामाजिक प्रभाव:-

वैश्वीकरण ने हमारी समाज पर भी एक गहरा असर रखता है , पहले लोगों में संयुक्त परिवार का चलन था और अब लोग एकाकी परिवार में रहना पसंद करते हैं। रहन सहन खानपान त्यौहार मनाने का चलन सामाजिकता और काफी सारे ऐसी चीजों की आदतें बदल चुकी हैं। इसका सबसे अधिक असर हमारी सामाजिक पहनावे पर देखने को मिलता है।

जरूर पढ़ें:  छुआछूत पर हिंदी में निबंध | Chuachut Par Nibandh Hindi Mein (Long & Short)

राजनीतिक प्रभाव:-

वैश्वीकरण बहुत प्रकार की गतिविधयों को नियमित करने की शक्ति सरकार के स्थान पर अंतर्राष्टरीय संस्थानों को देता है।वशीकरण कई सरकारों को निजी क्षेत्र की सुविधा प्रदान करने हेतु कई विधायी कानूनों और संविधान बदलने के लिए विवश करता है।

वैश्वीकरण का लाभ या हानी:-

दरअसल यह बताना बहुत ही मुश्किल हो जाता है की वैश्वीकरण किसी के लिए लाभ है या हानि क्योंकि वैश्वीकरण ने मानवता के जीवन को विकसित तो किया ही है और परंतु साथ ही साथ यह नजर अंदाज जी नहीं किया जा सकता की आधुनिकरण होना कभी-कभी नुकसानदायक भी महसूस किया जाता है क्योंकि वैश्वीकरण ने लोगों को विज्ञान और तकनीकी से जोड़ा है तो वहीं पर हमें पर्यावरण और सामाजिकता से दूर भी हटाया है।

विकास की राह पर चलने वाली देशों को एक नई वातावरण दीया है और तकनीकी और विज्ञान में विकसित भी किया है। यह किसी भी विकासशील कंपनी और इंडस्ट्री को विकसित करने में बहुत हद तक कारगर साबित होता है और साथ में बहुत सारी चुनौतियां को कम करता है। वैश्वीकरण के अंतर्गत कई सारी विदेशी कंपनियां इंडस्ट्रीज इतने बड़े-बड़े कारखाने खोलती है उससे घरेलू लोगों को नौकरी मिल जाती है परंतु जी हमारे पर्यावरण को जहरीला बना देती है।