कंप्यूटर पर हिंदी निबन्ध

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कंप्यूटर को हिंदी में “संगणक यंत्र” के नाम से भी जानते हैं।कंप्यूटर आधुनिक जगत का सबसे महान और न्यूनतम खोज है। कंप्यूटर शब्द का इस्तेमाल सर्वप्रथम 1613 में एक अंग्रेज लेखक की लिखी हुई पुस्तक “द यंग मैन ग्लीनिंग्स” में पाया गया। इसका इस्तेमाल लगभग सभी जगहों पर ही है। कंप्यूटर का प्रयोग लगभग हर क्षेत्र में है क्योंकि यह बड़ी से बड़ी जानकारी और डाटा को अपने स्टोरेज में बहुत ही सुरक्षित रख पाता है, और यही कारण है कि आधुनिक विश्व में इसका बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।

कंप्यूटर मानव जाति के लिए एक वरदान साबित हो रहा है क्योंकि यह बहुत ही कम समय और श्रम होने के बावजूद उपहार स्वरूप यह हमारे कठिन से कठिन काम भी बहुत जल्द संभव कर देता है। कंप्यूटर का इस्तेमाल इतना सरल है कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक के लोग इसका बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके साथ ही इंटरनेट के जरिए वे काफी सारे जानकारियां भी प्राप्त करते हैं।

पिछले कई दशक से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है तथा नई पीढ़ियों के साथ-साथ इस में कई सारे विकसित उपकरणों का भी इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। कंप्यूटर एक ऐसा यंत्र है जो इनपुट और आउटपुट प्रणाली पर काम करता है। कंप्यूटर में हम अपनी जरूरी दस्तावेज और डेटा सुरक्षित रख सकते हैं। आज हम कंप्यूटर का इस्तेमाल हर एक जगह देख रहे हैं क्योंकि इसका इस्तेमाल सुगम और सरल है, इसका इस्तेमाल व्यापक रूप से विद्यालय, महाविद्यालय, बैंक, होटल अस्पताल दुकान शिक्षण संस्थान और उद्योग में हो रहे हैं।

कंप्यूटर की स्मरण शक्ति काफी शक्तिशाली होती है उसे एक बार दिए गए निर्देश को हमेशा याद रखती है। माता पिता अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए भी मोबाइल कंप्यूटर लैपटॉप जैसे उपकरण खरीदते हैं। इसका इस्तेमाल कार्यस्थलों पर दस्तावेज को सुरक्षित रखने के लिए तो करते ही हैं साथ में लोग अपने मनोरंजन के लिए भी जैसे गेम्स खेलना गाना सुनना क्या फिर मनोरंजक वीडियो देखने के लिए भी व्यापक रूप से कर रहे हैं। कंप्यूटर को बिजली और बैटरी दोनों के उपयोग से चलाया जा सकता है।

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विषय - सूची

कंप्यूटर का इतिहास:-

  1. विल्हेम शीकार्ड 1623 में कैलकुलेटर का आविष्कार किया जोकि जोड़, घटाव, गुणा व भाग करने में सक्षम था।
  2. ब्रिटिश गणितज्ञ और वैज्ञानिक चार्ल्स बैबेज ने 1883-71 में एनालिटिकल इंजन’ का निर्माण किया।
  3. जर्मन इंजीनियर कोनार्डसे 1941 में डिजिटल कम्प्यूटर Z3 का आविष्कार किया।
  4. 1944 में हावर्ड के प्रोफेसर हॉवर्ड आइकेन ऑटोमेटिक डिजीटल कम्प्यूटर ‘मार्क-1’ का निर्माण किया।
  5. 1946 में जॉन माउचली और जे. प्रेस्पर इकेर्ट ने ‘इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एंड कम्प्यूटर – इनिएक’ (ENIAC) का अविष्कार किया। इनिएक एक कमरे के आकार का 30 टन का कंप्यूटर था जिसमें 1800 वेक्यूम ट्यूब लगे हुए थे। उसके उपरांत 1951 में जॉन माउचली ने ‘यूनिवेक’ (UNIVAC) का निर्माण किया।
  6. 1971 में इंटेल ने सर्वप्रथम कमर्शियल माइक्रोप्रोसेसर कंप्यूटर का विकास किया।
  7. हेलसिंकी यूनीवर्सिटी के विद्यार्थी लाइनस टोरवाल्ड्स ने 1991 में पर्सनल कम्प्यूटर के लिए ‘लाइनेक्स’ का आविष्कार किया।
  8. 2005 में एप्पल ने घोषणा की कि वह 2006 से अपने मैकिंटोश कम्प्यूटरों में इंटेल माइक्रोप्रोसेसरों का प्रयोग आरंभ कर देगा।

कंप्यूटर के भाग (अंग):-

कंप्यूटर प्रमुख चार भागों से मिलकर बनता है।

1. निविष्ट यंत्र(इनपुट डिवाइस) :-

निविष्ट यंत्र के अंतर्गत कीबोर्ड , माउस , जॉय स्टिक , स्कैनर , माइक्रोफोन जैसे कई प्रकार के सामग्री आती है। इन सब सामग्रियों के उपयोग से कंप्यूटर को निर्देश और आंकड़े भेजे जाते हैं।

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2. केंद्रीय प्रक्रमन इकाई(सी. पी. यू) :-

केंद्रीय प्रक्रमन इकाई(सी. पी. यू) को कंप्यूटर का दिमाग कहा जाता है। क्योंकि ये कंप्यूटर में दिए गए आंकड़ों के अनुरूप कार्य करती है।

3. सूचना भंडारण उपकरण(इंफॉर्मेशन स्टोरेज डिवाइस):-

‌‌यह डिवाइस कंप्यूटर में दिए गए सूचनाओं को सुरक्षित सहेजती है।

ये डिवाइस दो प्रकार की होती है :-

अल्पकालिक भंडारण उपकरण
1. राम (RAM)
2. रोम (ROM)

दीर्घकालिक भंडारण उपकरण
° हार्ड डिस्क
° फ्लॉपी डिस्क
° ब्लू रे डिस्क
° सीडी और डीवीडी

4. निर्गम यंत्र(आउटपुट डिवाइस) :-

निर्गम यंत्र के अंतर्गत सूचना प्रसारण करने वाले उपकरण जैसे में मॉनिटर, प्रिंटर और स्पीकर शामिल हैं।

कंप्यूटर के प्रकार:-

1. सुपर कंप्यूटर:-

ये सबसे तेज गति से काम करने वाला कंप्यूटर (संगणक यंत्र) है। सुपर कंप्यूटर को कठिन और जटिल कार्यों के इस्तेमाल में लाया जाता है जैसे मौसम की भविष्यवाणी, जटिल सिमुलेशन, मिसाइलों के डिजाइन इत्यादि।

2. मेनफ्रेम कंप्यूटर :-

यह कंप्यूटर (संगणक) सुपर कंप्यूटर से कार्य क्षमता में कम होती है। इन कंप्यूटर पर एक साथ 256 लोग काम कर सकते हैं।

3. मिनी कंप्यूटर :-

मेनफ्रेम कंप्यूटर से छोटे और पर्सनल कंप्यूटर से बड़े होते हैं।

4. माइक्रो कंप्यूटर :-

माइक्रो कंप्यूटर को पर्सनल कंप्यूटर भी कहा जाता है ये सबसे छोटा कंप्यूटर होता है। माइक्रो कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं । जैसे :-
डेक्सटॉप, लैपटॉप, पाल्म टॉप (स्मार्टफोन, म्यूजिक प्लयेर वीडियो प्लेयर टैबलेट संगणक इत्यादि)

कंप्यूटर के उपयोग:-

  • दूरदराज लोगों को ईमेल भेजना
  • लोगों में जानकारी साझा करना और सहेजना
  • कंप्यूटर के द्वारा शिक्षा का प्रसार आसानी से संभव हो जाता है
  • आधुनिक कंप्यूटरों से दूरसंचार
  • कंप्यूटर की सहायता से डिजाइन और ड्राफ्टींग भी आसान हो जाता है।
  • कंप्यूटरों की मदद से वैज्ञानिक भी अनुसंधान करने में सहायता लेते हैं।
  • कंप्यूटर छात्रों और शिक्षकों को पुस्तक पढ़ने और जानकारी प्राप्त करने में भी मदद करता है।
  • बहुत प्रकार की जानकारियों को भी कंप्यूटर पर संजोया जा सकता है।
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कंप्यूटर की भाषा:-

बायनरी लैंग्वेज :

कंप्यूटर शुरुआती दौर में (द्विआधारी भाषा) बाइनरी लैंग्वेज को ही समझता था। यंत्र से सीधा संपर्क होने के कारण इस यंत्र भाषा (मशीनरी लैंग्वेज) भी कहा जाता था।

असेंबली लैंग्वेज:

बायनरी लैंग्वेज को उपयोग करना बहुत ही जटिल हो गया था इसलिए बाद में चलकर संयोजन भाषा (असेंबली लैंग्वेज) का आविष्कार हुआ और कंप्यूटर की लैंग्वेज की जटिलता को कम किया गया। इस लैंग्वेज के अंतर्गत कंप्यूटर को संकेतों की भाषा से काम किया जाने लगा।

हाई लेवल लैंग्वेज(उच्च स्तरीय भाषा):

इस भाषा से कंप्यूटर को और भी सरलता से इस्तेमाल किया जाने लगा।उच्च स्तरीय भाषायों या हाई लेवल लेंगवेजों को मशीन भाषा में परिवर्तित करने के लिए संकलक (Compiler) और व्याख्याता (Interpreter) की जरूरत पड़ती है।

निष्कर्ष :-

आधुनिक जगत में कंप्यूटर लोगों की बेसिक जरूरत बन चुकी है। आज अगर हम विकास के पथ पर कदम रख रहे हैं तो हर संभव कंप्यूटर की वजह से मुमकिन हो पा रहा है। कंप्यूटर के उपयोग से आधुनिक युग में हर एक व्यक्ति को लाभ मिल रहा है। लगभग सारे ही क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है। कई मायनों में कंप्यूटर का दुरुपयोग भी हो रहा है और हमें इस दुरुपयोग पर ध्यान देना चाहिए और दुरुपयोग ना कर के सदुपयोग करना चाहिए।

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