लोकतंत्र पर निबंध

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Democracy in India लोकतंत्र – जनतंत्र – प्रजातंत्र दो शब्द से मिलकर बनता है। लोक और तंत्र। जन और तंत्र। प्रजा और तंत्र। लोक का अर्थ जनता और तंत्र का अर्थ शासन होता है। अर्थात लोकतंत्र का अर्थ जनता का शासन ।लोकतंत्र को प्रजातंत्र ही कहा जाता है। लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ जनता द्वारा जनता के लिए जनता प्रशासन होता है। लोकतंत्र में जनता अपने शासक खुद चुनते हैं। 2000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना लोकतंत्र का इतिहास रहा है।

अधिकतर देश की शासन व्यवस्था को अपनाया है। कई देशों तो सैकड़ों साल से लोकतंत्र को अपना रहे हैं। इसीलिए इन्हें लोकतंत्र का जनक दिखाते हैं। लेकिन भारत का लोकतंत्र विश्व के सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। इसका कारण समय-समय पर जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार किया जाना है। भारत पर 1947 से पहले सदियों वर्ष तक अनेक लुटेरों द्वारा शासन किया गया। भारत को 1947 में कथत परिश्रम के बाद आजादी मिली। जिसके बाद भारत एक लोकतांत्रिक देश बना। भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से देखा जाए तो दुनिया के सातवा देश हैं और आबादी के दृष्टि से दूसरे स्थान पर हैं।

इन्हीं कारण से भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। भारत में 1947 में आजादी प्राप्ति के बाद लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ। उसके बाद हर 5 साल पर लोकसभा और विधानसभा का चुनाव होता है। जिसमें सबसे अहम भूमिका जनता का होता है । जनता के द्वारा सांसद और विधायक को वोट किया जाता है। जिसका बहुमत आता है वह उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। उसका नाम सांसद और विधायक पड़ता है। फिर वह एक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चयन करते हैं ।इनका कार्यकाल 5 साल का होता है। एक होता है राज्यसभा इसका चुनाव जनता के द्वारा चुने गए शासक के द्वारा चुना जाता है। यह केंद्र के लिए राज्यसभा सांसद एवं राज्य के लिए विधान पार्षद कहलाते हैं। इनकी कार्यकाल की अवधि 6 वर्ष की होती है।

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भारत में लोकतंत्र पांच लोकतांत्रिक तरीके पर काम करते हैं:-

लोकतांत्रिक इसका अर्थ है कि नागरिक द्वारा भारत सरकार चुनी जाती है।
गणराज्य इसका अर्थ देश का प्रमुख एक वंशानुगत राजा रानी मंत्री आदि नहीं होता है।
समाजवादी इसका अर्थ सभी जनता को आर्थिक और सामाजिक समानता प्रदान करवाना होता है।
संप्रभुता इसका अर्थ भारत किसी भी विदेशी शक्ति के हस्त छपिया नियंत्रण से मुक्त है।
धर्मनिरपेक्ष इसका अर्थ किसी भी धर्म को अपनाने की आजादी दी जाती है आप स्वतंत्र हो चाहे आपको धर्म परिवर्तन क्यों क्यों न करने का मन हो।

भारत में 18 वर्ष से ज्यादा किस सभी नागरिक को वोट गिराने का अधिकार दिया जाता है।एवं अपने मन के अनुसार जनता के शासक चुनने का अवसर दिया जाता है। मतदान के अधिकार प्रदान करने के लिए धर्म, लिंग, शिक्षा, जाति, आदि के आधार पर भेदभाव नहीं होता है। भारत में कई पार्टियों हैं जिनमें उनके उम्मीदवार उनके तरफ से चुनाव लड़ते हैं। जिनमें प्रमुख इस प्रकार हैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कॉन्ग्रेस) , जनता दल यू (जदयू) , राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), जन अधिकार पार्टी (जाप), राष्ट्रीय जन जन पार्टी (राजपा) आदि। जनता उम्मीदवार को वोट देने से पहले पार्टियों या प्रतिनिधि के पूर्व कार्यकाल के कार्य का मूल्यांकन करते हुए अपना मतदान करती है। हालांकि कभी-कभी नया उम्मीदवार मैदान में आकर झूठा वादा करके जनता का मन मोह लेते हैं। और सत्ता में आकर जनता के लिए कामना करके खुद अपने लिए काम करते हैं।

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सुधारसबसे पहले योग्य उम्मीदवार को ही खड़ा होने का अधिकार दिया जाए। क्योंकि शिक्षित नेता ही सबसे अच्छा नेतृत्व कर सकता है। और देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। कई बार तो यह देखने को मिल जाता है की जनता के प्रतिनिधि को सही से बोलने और लिखने नहीं आता है। इससे निवारण हेतु एक परीक्षा का आयोजन किया जाए ताकि योग्य प्रतिनिधि का चुनाव हो सके। सबसे महत्वपूर्ण कारण है गरीब जो लोकतंत्र को बहुत बड़ी बाधाएं पहुंचाती है।

देखा जाए तो गरीबी इलाका में प्रतिनिधि खड़ा होकर बिना काम बिना विकास के अपने कार्यकाल समाप्त कर लेते हैं और फिर दोबारा सत्ता में भी आ जाते हैं। क्या आपने कभी सोचा की इसका कारण क्या है। जहां तक मेरा मानना है कि सबसे बड़ा कारण गरीबी है। क्योंकि लाचार मनुष्य भूखा मनुष्य कुछ भी करने को तैयार हो जाता है यहां तक की आत्महत्या भी तो आखिर मतदान क्या चीज है साहब। मतदान में भी वही होता है पैसे पर मतदान कर जाते हैं और लाचारी के वजह से गलत प्रतिनिधि चुन बैठते हैं। जो लूट खाचरोद के जनता का देश का संपत्ति को पूरा कार्यकाल में अपने नाम पर करवाने में लगे रहते हैं। तो इससे निवारण हेतु सरकार को शिक्षित समाज को गरीबी दूर करना होगा।

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एक कारण यह भी है जो अशिक्षित जनता गरीब जनता को प्रतिनिधि के द्वारा गलत समझा दिया जाता है। और जनता शिक्षा के अभाव में गरीबी के कारण उनके गलत वादे को मान जाते हैं। इसके लिए साक्षरता रेट बढ़ाना होगा और शिक्षा के प्रति समाज को जागरूक करना होगा। शिक्षित समाज का निर्माण करना पड़ेगा। उसके बाद आरक्षण में सुधार होना चाहिए सत्ता के लोभी अपने सत्ता को देखते हुए एक विशेष जाति के जनता को इनका संख्या ज्यादा हो और और अशिक्षित हो उनको आरक्षण का लोभ देखें उनसे अपने पक्ष में मतदान करवाकर लोकतंत्र का हनन करते हैं।

एक विशेष समाज को जाति को आरक्षण देकर दूसरी जाति को खाई में धकेलने का काम करते हैं। आत्महत्या करने पर मजबूर करते हैं। जैसा कि शिक्षा जगत में ले लिया जाए कोई आईएएस के एग्जाम में या कोई अन्य की एग्जाम में 100 नंबर वाले पदाधिकारी नहीं बनेंगे बल्कि आरक्षण के आधार पर 50 नंबर वाले पदाधिकारी बन जाएंगे। इस पद्धति को बरकरार रखने से देश का कभी विकास नहीं हो सकता इसीलिए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए। वह भी शिक्षा जगत में नहीं। तो हमारे देश और देशवासियों दोनों का भला होगा तो। तब हमारा देश विकासशील से विकास बनेगा। इसी प्रकार से भारत का लोकतंत्र है।

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