बदलते मौसम के तरह, लोगों के बदलते विचार

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आज कुछ ऐसे बातों पर चर्चा करेंगे जिससे हर रोज हर लोग इस दौर से गुजरा करते हैं।आज सबकी मानसिकता बहुत ही तेजी से खराब होती जा रही है। देखिए कुछ ऐसी सोच या घटना जो आपके आंखों में आंसू लाने को मजबुर कर देगा और साथ ही साथ आप सोचने को भी मजबुर हो जाएंगे। 

जिसने तुझे पैरों पर किया खड़ा आज उसे ही पैर से मार रहे हो

ना जाने क्यों जैसे-जैसे दिन बीते चले जा रहे हैं वैसे ही लोगों की मानसिकता भी बदलती जा रही है। एक मां नौ महीने कष्ट सह कर एक बच्चे को जन्म देती है वहीं वो बच्चा बड़े होकर उन मासूम माता-पिता को घर से ही बेघर कर देते हैं।एक पिता ना जाने कितने पत्थर को तोड-तोड़ कर अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर उसे जीना सिखाता है तो वहीं बच्चे बड़े होकर उन्हें ज़िन्दगी जीना ही भुला देते हैं।जिसने पूरी ज़िन्दगी बच्चों की खुशियां मांगी, आज उनके बुढ़ापे आने तक उनके बच्चे उन्हें सड़कों पर उतार देते हैं। 

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लड़की है वो, किसी के घर की पायदान नहीं

आज हर रोज 80% प्रतिशत लड़कियां कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा छेड़ी जाती हैं।अब इस जमाने में इंसानों में इंसानियत नाम की चीज ही नहीं रह गई है। कहां-कहां और किससे-किससे अपने को बचाते फिरे ये लड़कियां,जहां निकलो वहीं उसे कुछ जानवरों की सामना करनी पड़ती है। क्या उसका जन्म ही बेकार हुआ है या लोगों में लड़कियों के प्रति मानसिकता ही बेकार है?बस में वो चढ़े तो रगड़े दे निकल जाते हैं लड़के, तेरे घर की पायदान नहीं है जो पैर रगड़ कर निकल जाते हो। आज भारत में ऐसी मानसिकता सिर्फ लड़कों में ही नहीं बल्कि कुछ बुढ़ापे में प्रवेश करने वालों की भी हो गई है।

दो वक़्त की रोटी जिसके नसीब नहीं कुछ ऐसे हैं यहां गरीब भी 

यूं हीं कोई मंदिर मस्जिद के आगे बैठ कर भीख नहीं मांगता है।उसे दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं होती है इसलिए वो मजबूरन लोगों के आगे सर झुकाता है। जहां लोग करोडपति होकर भी खुश नहीं रह पाते हैं वहीं वो गरीब को एक रुपए मिलने पर भी खुशी मिलती है।वो कोई जानवर नहीं जो उसके भीख मांगने पर उसे डांट फटकार देते हो, वो भी एक इंसान है जो अपने हालात से भीख मांगने को मजबुर होता है। किसकी भला शौख होती है किसी के आगे गीरगीराने की हर लोग ज़िन्दगी शान से जीना चाहते है।

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भारत में पढ़ाई के दबाव से लाखों बच्चे देते है जान

हर पैरेंटस का सपना होता है कि उनके बच्चे उनका नाम रौशन करे।लेकिन भगवान ने भी तो हर किसी के दिमाग की छमता अलग अलग बनाई है। कोई एक सेकंड में सब याद कर लेता तो किसी से एक दिन में भी नहीं होता है। फिर आते हैं कुछ ऐसे फैमिली जो मजबुर कर देते हैं अपने बच्चों को जान देने के लिए, क्यूंकि हर वक़्त वो उसे ताना देते रहते हैं या फिर अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं।जैसे ३ इडियट्स मूवी में देखा होगा आपने वो बच्चा इंजीनियरिंग नहीं करना चाहता था फिर भी उसके पैरेंट्स ने मजबुर कर दिया था। अंततः दबाव में आकर उसने जान दे दी थी। ऐसे ही भारत में हर साल लाखों बच्चे जान दे देते हैं।

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